2 BEST SHORT MOTIVATIONAL STORIES IN HINDI

2 BEST SHORT MOTIVATIONAL STORIES IN HINDI 


1. आखिरी कदम | THE LAST STEP

सुबह की सुनहरी धूप पहाड़ की चोटी पर बिखर रही थी, जब डैनियल ने अपने बैग की पट्टियाँ कसकर बाँधी। उसकी साँसें थमी हुई थीं, लेकिन दिल जोरों से धड़क रहा था उत्साह से। आज का दिन खास था। सालों की मेहनत, संघर्ष और असफलताओं के बाद, आखिरकार वह यहाँ था |बस कुछ ही कदम दूर अपने सपने से, माउंट एवरेस्ट की चोटी को छूने से।


ठंडी हवा उसके चेहरे को छू रही थी, और उंगलियाँ हल्की सुन्न हो चुकी थीं। फिर भी, उसने अपना आइस ऐक्स कसकर पकड़ा और एक और कदम आगे बढ़ाया। हर कदम जैसे उसके शरीर के खिलाफ एक लड़ाई थी, लेकिन वह हार मानने वालों में से नहीं था। हवा तेज़ी से चल रही थी, जैसे उसे उसकी पुरानी असफलताओं की याद दिला रही हो। लेकिन अब डैनियल ने इन आवाज़ों को अनसुना करना सीख लिया था।


कुछ साल पहले, लोगों ने कहा था कि वह काफी मजबूत नहीं है, उसमें योग्यता नहीं है, और न ही उसमें लगन है। उसका पहला बड़ा  आधे रास्ते में छोड़ना पड़ा था, और सबने कह दिया कि वह कभी सफल नहीं होगा। उसने दूसरों को चोटी तक पहुँचते देखा, जबकि वह पीछे खड़ा सोच रहा था कि क्या वह कभी ऐसा कर पाएगा। लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने और ज्यादा मेहनत की, असफलताओं का सामना किया, और हर गिरने के बाद खुद को फिर से खड़ा किया।

और आज, चोटी के ठीक नीचे, उसका शरीर पूरी तरह से थक चुका था। साँसें तेज़ चल रही थीं, लेकिन शिखर बस सामने था। एक कदम और बढ़ाया, फिर एक और, और फिर—उसके जूते एवरेस्ट की सबसे ऊँची चोटी को छू चुके थे|

वह वहाँ खड़ा था, पूरी दुनिया को नीचे देखते हुए। ठंडी हवा में उसकी आँखों से बहते आँसू भी जम चुके थे, लेकिन दिल एक अजीब सी खुशी से भर चुका था। उसने सिर्फ एक पर्वत नहीं जीता था, बल्कि अपने भीतर के डर और संदेह को भी हरा दिया था।


आँखें बंद करके उसने धीमे से कहा,
"सबसे मुश्किल हमेशा आखिरी कदम होता है, लेकिन वही एक कदम सब कुछ बदल देता है।"

2.छोटे कदम, बड़ी उड़ान| Small Steps, Big Flight

राजू एक छोटे से गाँव का लड़का था, लेकिन उसके सपने आसमान से भी ऊँचे थे। जब भी वह अपने गाँव के ऊपर से उड़ते हुए हवाई जहाज को देखता, उसकी आँखों में एक अलग सी चमक आ जाती। वह खुद को एक दिन पायलट की यूनिफॉर्म में देखता, ऊँचे आसमान में उड़ते हुए। लेकिन यह सपना देखना जितना आसान था, उसे पूरा करना उतना ही मुश्किल।

उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उसके पिता एक छोटे किसान थे और माँ घर का काम संभालती थीं। गाँव में लोग पढ़ाई को उतनी अहमियत नहीं देते थे। जब राजू ने अपने घरवालों को बताया कि वह पायलट बनना चाहता है, तो सभी ने उसे हँसी में उड़ा दिया।

"हमारे जैसे लोग पायलट नहीं बनते, बेटा!" उसके पिता ने सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।


पर राजू की जिद्द को कोई तोड़ नहीं सकता था। वह स्कूल में मेहनत से पढ़ाई करता, टीचर्स से नए-नए सवाल पूछता और लाइब्रेरी में घंटों किताबें पढ़ता। गाँव में इंटरनेट की सुविधा नहीं थी, तो वह अखबारों और किताबों से ही नई-नई जानकारी इकट्ठा करता।

एक दिन, स्कूल में एक स्कॉलरशिप की जानकारी आई—ऐसे बच्चों के लिए जो पढ़ाई में अच्छे थे लेकिन व्यवस्था कम थी। यह मौका राजू के लिए किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं था। उसने मेहनत की, रात-रात भर जागकर पढ़ाई की और आखिरकार, वह स्कॉलरशिप जीत गया!


उसकी पढ़ाई शहर के एक अच्छे स्कूल में हुई, जहाँ उसे नए दोस्त, अच्छे टीचर्स और बेहतर सुविधाएँ मिलीं। लेकिन मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। हवाई उड़ान की ट्रेनिंग के लिए बहुत पैसे लगते थे।

राजू ने हार नहीं मानी। उसने पार्ट-टाइम जॉब की, पढ़ाई में टॉप किया और एक और स्कॉलरशिप जीती, जिससे उसे एविएशन ट्रेनिंग के लिए मदद मिली। उसकी मेहनत और लगन का नतीजा यह निकला कि कुछ सालों बाद, वह सच में एक पायलट बन गया।


आज, जब भी वह अपने गाँव के ऊपर से हवाई जहाज उड़ाता है, नीचे खेलते छोटे बच्चों को देखता है, तो उसे अपना बचपन याद आ जाता है। शायद कोई और बच्चा भी उसे देखकर बड़ा सपना देखे और उसे पूरा करने की हिम्मत जुटाए।

राजू ने अपने सपनों की उड़ान भरी, लेकिन वह जानता था—
"बड़े सपनों को पूरा करने के लिए छोटे कदम भी मायने रखते हैं।"

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