Motivational Story For students in hindi | दो कहानी

 2 Motivational Stories for Students in Hindi


  • The Last Try"आखिरी कोशिस"

रायन अपनी कुर्सी पर बैठा, किताबों के ढेर को घूर रहा था। उसके फाइनल एग्ज़ाम कुछ ही दिनों में थे, लेकिन असफलता का डर उसके मन में घर कर चुका था। वह पहले ही एक बार गणित की परीक्षा में फेल हो चुका था—तो फिर दोबारा कोशिश करने का क्या फ़ायदा?

"रायन, खाना तैयार है," उसकी माँ ने रसोई से आवाज़ दी।

"मुझे भूख नहीं है," रायन ने धीरे से कहा।


उसकी माँ दरवाजे पर आईं, उनकी आँखों में प्यार और समझदारी झलक रही थी। "तुम्हें पता है, जब मैं स्कूल में थी, तो मुझे भी लगता था कि मैं कभी केमिस्ट्री नहीं समझ पाऊँगी। मुझे लगा कि मैं इसमें कभी सफल नहीं हो सकती। लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ—एक बार फेल होने का मतलब यह नहीं कि हम हमेशा हार मान लें।"

रायन ने गहरी साँस ली। "अगर मैं फिर से फेल हो गया तो?"

माँ मुस्कुराईं। "तो फिर से कोशिश करना। असली हार तब होती है जब हम कोशिश करना छोड़ देते हैं।"

उस रात, रायन ने तय किया कि वह एक आखिरी बार पूरी मेहनत करेगा। उसने अपना अलार्म जल्दी लगाया, नोट्स दोबारा लिखे, और सवालों का अभ्यास किया।


एग्ज़ाम के दिन, जब उसने पेपर दिया, तो उसने कुछ नया महसूस किया—उम्मीद।

एक हफ्ते बाद, टीचर ने उसका टेस्ट वापस दिया। रायन ने झिझकते हुए अपना नंबर देखा। उसका दिल तेज़ धड़क रहा था—89%।

परफेक्ट नहीं था, लेकिन बेहतर था



और सबसे ज़रूरी बात—यह इस बात का सबूत था कि कोशिश करना हमेशा सार्थक होता है।


  • The Power of Yet"अभी नहीं पर जल्द ही!

प्राची अपनी कॉपी के खाली पन्ने को देख रही थी। उसके निबंध के शब्द उसके दिमाग से बाहर ही नहीं आ रहे थे। उसने कई बार कोशिश की, लेकिन लेखन उसका मज़बूत पक्ष कभी नहीं रहा।

"मैं यह नहीं कर सकती," उसने परेशान होकर अपनी पेंसिल टेबल पर फेंक दी।

उसकी सबसे अच्छी दोस्त, दिव्यांशी, जो अपना काम कर रही थी, मुस्कुराई। "तुम कहना चाहती हो कि अभी नहीं कर सकती।"


प्राची हैरानी से देखा। "इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?"

"बहुत बड़ा फ़र्क़," दिव्यांशी ने हँसते हुए कहा। "अभी नहीं कहने का मतलब है कि तुम अभी सीख रही हो। इसका मतलब यह है कि तुम आगे बढ़ रही हो, और एक दिन इसे कर लोगी।"

प्राची ने गहरी साँस ली और अपनी पेंसिल उठाई। धीरे-धीरे, उसने पहली पंक्ति लिखी। फिर दूसरी।

शब्द परफेक्ट नहीं थे, लेकिन उसने लिखना शुरू कर दिया था।

जब तक निबंध पूरा हुआ, यह शानदार नहीं था, लेकिन लिखा जा चुका था। और उसने महसूस किया कि वह लेखन में बुरी नहीं थी—बस अभी उस स्तर तक नहीं पहुँची थी।

उस दिन के बाद, जब भी उसे कोई चीज़ मुश्किल लगती, वह खुद से एक ही बात कहती:
"अभी नहीं, पर जल्द ही!"



ये दोनों कहानियाँ हमें यह सिखाती हैं कि असफलता कोई अंत नहीं, बल्कि एक नया मौका है। हार नहीं मानो, क्योंकि कोशिश ही सफलता की कुंजी है! 🚀

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